कानपुर देहात। आयुष्मान आरोग्य मंदिर भिखनापुर, विकासखंड सरवनखेड़ा में संचारी रोग नियंत्रण एवं फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत संचारी दस्तक अभियान की समीक्षा, सीएचओ-पीएसपी गठन, पीएसपी सदस्यों का प्रशिक्षण, एमएमडीपी (रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता रोकथाम) स्वयं-देखभाल प्रशिक्षण एवं एमएमडीपी किट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीएचओ संध्या यादव, जिला समन्वयक प्रेम सिंह कटियार , रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. शिवाकांत , बीसीपीएम चंद्रभान राजभर, ग्राम प्रधान संतोष , आशा-संगिनी कांति, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा फाइलेरिया मरीजों सहित कुल 44 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान 22 फाइलेरिया मरीजों को प्रधान संतोष द्वारा एमएमडीपी किट वितरित की गईं। सीएचओ संध्या यादव एवं आशा-संगिनी द्वारा फाइलेरिया मरीज चुन्नी के प्रभावित पैर पर व्यावहारिक एमएमडीपी सेल्फ-केयर डेमोंस्ट्रेशन कराया गया। इसके माध्यम से प्रभावित अंग की नियमित साफ-सफाई, त्वचा की देखभाल, व्यायाम एवं संक्रमण से बचाव के संबंध में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को एमएमडीपी मॉड्यूल, फ्लिपबुक एवं पीपीटी के माध्यम से फाइलेरिया एवं मरीजों की देखभाल के संबंध में प्रशिक्षित किया गया।
पीएसपी सदस्यों को उनके कार्य एवं दायित्व, मासिक कार्ययोजना, मरीजों के नियमित फॉलोअप तथा समुदाय में फाइलेरिया उन्मूलन हेतु जनसहभागिता बढ़ाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। बीसीपीएम द्वारा संचारी दस्तक अभियान की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए पात्र मरीजों की पहचान, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं एवं उपचार से जोड़ने पर जोर दिया गया। साथ ही फाइलेरिया मरीजों के डेटा को ई-कवच पोर्टल पर नियमित रूप से अद्यतन एवं संग्रहित करने के निर्देश दिए गए।
फाइलेरिया मरीजों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, पी.एच.सी.,सी.एच.सी., मेडिकल कॉलेज एवं आयुष अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं हेतु लिंक करने तथा प्रत्येक माह निश्चय दिवस अथवा आवश्यकता के अनुसार किसी भी दिन स्वास्थ्य केंद्र पर फॉलोअप कराने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि बीमारी की गंभीरता, संक्रमण एवं संभावित जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
बैठक में संचारी रोग, मलेरिया, डेंगू, टीबी एवं फाइलेरिया से बचाव के उपायों पर चर्चा करते हुए समुदाय में जागरूकता एवं सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया गया। सीएचओ द्वारा धात्री माताओं को शिशु के लिए छह माह तक केवल स्तनपान कराने के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया। ग्राम प्रधान ने फाइलेरिया मरीजों को यूडीआईडी कार्ड, पेंशन एवं अन्य पात्र कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने में आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने फाइलेरिया एवं टीबी उन्मूलन, मरीजों के नियमित फॉलोअप, एमएमडीपी सेल्फ-केयर को बढ़ावा देने तथा समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।









