एरवाकटरा (औरैया): कस्बे में ईद-उल-मिलाद-उन-नबी के मौके पर निकाले गए जुलूस के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मुख्य मार्ग पर घंटों लगे भीषण जाम के कारण आम राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अव्यवस्था का आलम यह रहा कि आपातकालीन सेवा में लगी एक एंबुलेंस भी घंटों जाम में फंसी रही, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल मूकदर्शक बना रहा।
जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा मरीज, गिड़गिड़ाते रहे परिजन
जुलूस जैसे ही कस्बे के प्रमुख बाजार से गुजरा, सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इसी बीच एक गंभीर मरीज को ले जा रही एंबुलेंस भी जाम के बीच ब्लॉक हो गई। काफी देर तक सायरन बजने के बावजूद न तो भीड़ ने रास्ता दिया और न ही पुलिस ने कोई तत्परता दिखाई। मरीज के परिजन एंबुलेंस से उतरकर रास्ता देने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन तमाशबीन बनी पुलिस और अव्यवस्था के आगे उनकी एक न सुनी गई।
प्रशासनिक मुस्तैदी और संवेदनहीनता पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इतने बड़े आयोजन के लिए पहले से कोई रूट डायवर्जन या ट्रैफिक प्लान तैयार नहीं किया गया था। एंबुलेंस जैसी अति-आवश्यक सेवा को सुरक्षित रास्ता दिलवाना पुलिस की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी थी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात जवान हाथ पर हाथ धरे खड़े रहे। तेज धूप और भीषण जाम में बच्चे, बुजुर्ग और मरीज घंटों बेहाल पड़े रहे।
स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश
इस पूरी घटना के बाद स्थानीय लोगों और व्यापारियों में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भारी गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता खुला रखना अनिवार्य होना चाहिए। क्षेत्रवासियों ने उच्च अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने, भविष्य के लिए मजबूत ट्रैफिक प्लान लागू करने और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।









