कानपुर देहात। अंग्रेजों भारत छोड़ो के आंदोलन की 84 स्मृति दिवस जिसे अगस्त क्रांति दिवस के नाम से जाना जाता है के मौके पर बताया गया बबलिया के मंगल पांडे ने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ जो जंग छोड़ी थी उसकी रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ती रही जहा भारत के वीर सपूतों ने अपने आत्म बल साहस और भारत माता की आन बान शान के लिए सब कुछ निछावर करने वालों ने अपनी जान गवाई वही शहीद वीरों की मशाल को जलाते हुए भारत के वीर सपूतों ने अपने संकल्पों से और आगे बढ़ाया मालूम हो कि 8 अगस्त 1942 को त्याग की पराकाष्ठा से अग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन दिवस या जिसे अगस्त क्रान्ति दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है इस दिन महात्मा गांधी ने मुंबई से गोवालिया टैंक मैदान जिसे आज अगस्त क्रांति मैदान कहा जाता है इस दिन महातमा गान्धी मैं जो नारा दिया था डू एण्ड डाई करो या मरो जिसे जवाहरलाल नेहरू सरदार वल्लभभाई पटेल महिलाओ मे उषा मेहता सुचेता कृपलानी सहित तमाम भारत के नौजवानों किसानोऔर मजदूरों ने एक साथ ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन ही नहीं उस नारे को सार्थक बनाए रखने का संकल्प लिया कि जब तक हमारा देश आजाद न हो जाए चैन से नही बैठेगेऔर हमारे भारत के वीर सपूत जेल गये उनके त्याग बलिदान और कुर्बानी से हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद भी हो गया यह आठ अगस्त क्रांति दिवस हमें राष्ट्र के प्रति समर्पण कर्तव्य निष्ठा त्याग बलिदान का नारा उस ऐतिहासिक आंदोलन की बड़ी विरासत है और हमारीआने वाली पीढियो को इस आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए देश की एकता अखंडता और स्वतंत्रता के लिए हम सब भारतियो को तन मन धन से हमेशा समर्पित रहने की आवश्यकता है यह जानकारी अगस्त क्रांति दिवस की स्मृति में जहां शहीद वीर सपूतों को नमन किया गया वही भारत मां की आन वान व शान के लिए सभी से प्राण और प्राण से संकल्पित रहने का वचन लिया गया। यह जानकारी शहीदों को याद करते हुए सरस्वती इसलिए मीडियम कालेज भटौली के प्रधानाचार्य अनुज कुमार तिवारी व राम अवतार दीक्षित कांग्रेस सेवा दल ने दी।









