कानपुर देहात। संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जयंती के अवसर पर बनारस से प्रारंभ हुई पवित्र कलश यात्रा शुक्रवार को कानपुर देहात पहुंची। यात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया गया।
बनारस की मिट्टी लेकर पहुंचे पदाधिकारी
बनारस के सीर गोवर्धनपुर स्थित श्री गुरु रविदास जन्म स्थान मंदिर, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और बाबा की प्रमुख जन्मस्थली है, वहीं की पवित्र मिट्टी को कलश में भरकर जिला मंत्री ऋषि सिंह और जिला महामंत्री सुमित दिवाकर रथ के साथ कानपुर देहात पहुंचे।
रायपुर सीमा पर हुआ ऐतिहासिक स्वागत
कानपुर देहात की सीमा रायपुर पर कलश यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। जिला अध्यक्ष रेणुका सचान के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुष्प वर्षा कर कलश का पूजन किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, राज्य मंत्री अजीत पाल राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, विधान परिषद सदस्य अविनाश सिंह चौहान, अनिल शुक्ला “वारसी”, पूर्व विधायक विनोद कटियार, निर्मला शंखवार, डॉ. सतीश शुक्ला, ब्लॉक प्रमुख राजेश शुक्ला, सत्यम सिंह चौहान, बबलू शुक्ला, धर्मेंद्र कुशवाहा, विकास मिश्रा और जिला मीडिया प्रभारी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने बाबा संत रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
रनिया बजार होते हुए रूरा में कलश स्थापित
कलश यात्रा रनिया बाजार में रोड के दोनो तरफ भारी भीड़ दर्शन के लिये उमड़ पड़ी रनिया से होते हुए अकबरपुर के रूरा क्षेत्र में स्थित रोशन मऊ के श्री गुरु रविदास मंदिर पहुंची। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से कलश स्थापित किया गया। मंदिर परिसर “जय गुरु रविदास, के नारों से गूंज उठा।
नेताओं ने डाला प्रकाश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष रेणुका सचान ने कहा कि “गुरु रविदास जी ने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का संदेश देकर समाज में समरसता और समानता की नींव रखी। उनका जीवन आज भी हमें सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।”
राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि “भाजपा कार्यकर्ता गुरु रविदास जी के आदर्शों को लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेंगे। उनकी 650वीं जयंती
को हम समरसता संकल्प के रूप में मनाएंगे।”
कलश स्थापना के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में लोगों ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया।









