रूरा, कानपुर देहात। भारतीय जनता पार्टी कानपुर देहात द्वारा “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” पर शिवम गेस्ट हाउस, रूरा में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में देश के विभाजन के दौरान हुई पीड़ा को याद कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
मुख्य अतिथि पूर्व जिला अध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा का बड़ा बयान
गोष्ठी के मुख्य अतिथि पूर्व जिला अध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा ने विभाजन की त्रासदी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कांग्रेस और सपा पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने कहा:
“14 अगस्त 1947 की रात देश का विभाजन हुआ था। यह विभाजन सिर्फ जमीन का नहीं था, यह दिलों का विभाजन था। यह विभाजन कांग्रेस की तुष्टिकरण और सत्ता की भूख की देन है। सत्ता के लिए कांग्रेस ने देश को काट दिया।
विभाजन के समय लाखों निर्दोष हिंदुओं का कत्लेआम हुआ। ट्रेनों में लाशें आईं, माताओं-बहनों के साथ अमानवीय अत्याचार हुए। करोड़ों लोग अपना घर-बार छोड़कर शरणार्थी बन गए। लेकिन कांग्रेस ने कभी उन शहीदों को याद नहीं किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2021 में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ घोषित करके उन पीड़ितों को सम्मान दिया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि तुष्टिकरण की राजनीति कितनी खतरनाक होती है।”
सपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा:
“पूर्ववर्ती सपा सरकार में उत्तर प्रदेश में जंगल राज था। मुजफ्फरनगर दंगे हों या प्रदेश भर में गुंडागर्दी, सबके सामने है। उस समय पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता था, बल्कि दंगाइयों को संरक्षण मिलता था। भाजपा सरकार ने कानून का राज स्थापित किया है। आज प्रदेश में कोई भी विभाजनकारी और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाला सिर नहीं उठा सकता।”
जिला अध्यक्ष रेणुका सचान ने कहा
“हमें संकल्प लेना होगा कि देश को फिर कभी विभाजित नहीं होने देंगे। एक भारत, श्रेष्ठ भारत के निर्माण में हर कार्यकर्ता को अपनी भूमिका निभानी होगी।”
जिला अध्यक्ष अशोक राजपूत ने कहा ने कहा कि नई पीढ़ी को विभाजन का सच बताना जरूरी है।
राज्य मंत्री अजीत पाल, विधायक पूनम संखवार और डॉ. सतीश शुक्ला ने भी विभाजन के समय शहीद हुए लोगों को नमन किया और देश की एकता को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम के अंत में 2 मिनट का मौन रखकर विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक राकेश तिवारी पूर्व जिला अध्यक्ष मदन पांडे महामंत्री बबलू शुक्ला केपी सिंह राम जी गुप्ता मोहित दुबे योगराज राजपूत राम प्रकाश कुशवाहा केपी सिंह रविंद्र अवस्थी क्रांतिवीर सिंह मोहित दुबे मौजूद रहे









