कुठौंद (जालौन)। विकास खंड कुठौंद क्षेत्र में कथित अवैध मत्स्य शिकार को लेकर ग्रामीणों की शिकायतों ने अब विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई जलस्रोतों में महीनों से खुलेआम मछली पकड़ी जा रही है। इसकी सूचना कई बार संबंधित विभाग और पुलिस को दिए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को शिकायतों के बाद मत्स्य विभाग की टीम ने क्षेत्र का दौरा जरूर किया, लेकिन जिन स्थानों पर ग्रामीण लंबे समय से अवैध मछली पकड़ने की शिकायत कर रहे हैं, वहां टीम के नहीं पहुंचने से कार्रवाई की पूरी कवायद सवालों के घेरे में आ गई।
ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में कथित रूप से कुछ लोगों ने मछली पकड़ने के लिए अपने अड्डे बना रखे हैं। आरोप है कि ये लोग लंबे समय से जलाशयों और नदी क्षेत्र में मछलियों का अवैध शिकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामला शिकायत और आश्वासन तक ही सीमित रह गया।
इसी बीच शुक्रवार को मत्स्य विभाग की टीम शंकरपुर चौकी पुलिस के सहयोग से सिरसा कलार थाना क्षेत्र के ग्राम करमुखा पहुंची। बताया गया कि टीम किसी शिकायत की जांच के सिलसिले में मौके पर पहुंची थी। टीम ने वहां पहुंचकर जानकारी ली, लेकिन कार्रवाई के लिए कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी और टीम को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।
इस दौरान सबसे बड़ा सवाल ग्रामीणों के बीच यही चर्चा का विषय बना रहा कि जब विभाग को क्षेत्र में अवैध मत्स्य शिकार की शिकायतें मिल रही हैं और ग्रामीण कथित मछली माफिया के अड्डों की जानकारी देने का दावा कर रहे हैं, तो आखिर टीम उन स्थानों तक क्यों नहीं पहुंची?
ग्रामीणों का कहना है कि केवल शिकायत वाले किसी एक स्थान का निरीक्षण करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि वास्तव में अवैध मत्स्य शिकार हो रहा है तो विभाग को पूरे क्षेत्र में अभियान चलाकर ऐसे स्थानों को चिन्हित करना चाहिए और नियमों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।
शिकायतें महीनों से, कार्रवाई अब भी सवालों में
ग्रामीणों का आरोप है कि कथित अवैध मछली पकड़ने का सिलसिला कोई नया मामला नहीं है। यदि विभाग को इसकी जानकारी लगातार मिल रही थी तो अब तक व्यापक स्तर पर जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह बड़ा सवाल है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को शिकायतों की गंभीरता को समझते हुए मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए, न कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहना चाहिए।
‘मछली माफिया’ के अड्डों पर कब होगी कार्रवाई?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान अवैध मत्स्य शिकार की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जिन स्थानों को कथित तौर पर अवैध मछली पकड़ने वालों का अड्डा बताया जा रहा है, वहां विभाग की टीम कब पहुंचेगी और वहां क्या कार्रवाई होगी?
मामले को लेकर मत्स्य विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में विभाग की शुक्रवार की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों की निगाह अब इस बात पर टिकी है कि क्या विभाग पूरे क्षेत्र में अभियान चलाकर कथित अवैध मत्स्य शिकार पर रोक लगाएगा या फिर यह दौरा भी महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध मत्स्य शिकार वाले स्थानों को चिन्हित करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की मांग की है।









