डेरापुर कानपुर देहात। मालूम हो कि त्योहार धार्मिक सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर मनाए जाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है धार्मिक परंपराओं में होली दिवाली रक्षाबंधन व दशहरा आदि वही राष्ट्रीय और राजनीतिक दृष्टिकोण से 15 अगस्त 26 जनवरी के अलावा महापुरुषों की जयंतियां पुण्य तिथियां झंडा दिवस सेना दिवस जैसे अनगिनत पर्व भी मनाए जाते हैं और वही सास्कृतिक त्योहारों में पारिवारिक परंपराएं शादी विवाह जन्मोत्सव आदि मनाए जाते हैं लेकिन मालूम हो कि हिंदू परंपराओं के त्यौहार प्राचीन काल में जैसे मनाए जाते थे अब आधुनिक युग में उनका धीरे-धीरे लोप होता जा रहा है मालूम हो कि रक्षाबंधन जैसे त्यौहार में गांव-गांव गली कूचो में झूलों की बहार महिलाओ द्वारा गाये सावन गीत जगह-जगह दंगल कूद पहलवानी आल्हा जैसे तमाम अन्य वीर गायको द्वारा संगीत के साथ लोग एक साथ बैठकर समूह में गायन किया करते थे इतना ही नहीं लोग एक दूसरे के हाथों में राखी बांधना और खप्पर में बोई भुजरीया एक दूसरे को देकर बंधुत्व और प्रेम की भावना जो दिखाई पड़ती थी शायद उसका कहीं नामोनिशान नहीं रहा है। इसका कारण आधुनिक युग में मानसिकता का एकाकी होना फोन चलाना खासतौर मालूम हो कि आज शायद सौ साल से चिलौली गांव में लगने वाला दंगल भले ही कुशतिया कम हुई लेकिन जन सहयोग से दंगल पुनः आयोजित हुआ। लोगो ने रक्षा बंधन की परम्परा रखी।नये लडके लडकिया एक दूसरे से दूरी नफरत आपसी मेल न करना के साथ सर्वे भवंतु की सुखना की भावना तिरोहित होने के कारण इस समय होने वाले लगभग सारे तीज त्यौहार जहां तिरोहित हो रहे हैं समय नही कारण मोबाइल नयी पीढी भविष्य बरवाद कर रही अनुशाशन संस्कार गायब वहीं मानव मानव तो छोड़िए भाई-बहिन दूर मात्र पैसा सब कुछ है और परिवार में भी प्रेम की भावना का लोप हो रहा है जिससे यह सारे त्यौहार भी उत्साह से नही हो रहे ।मात्र लकीर पिट रही है।









