कानपुर देहात मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं और पक्षियों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। अत्यधिक तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है, जिससे कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि पानी शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। पशुओं के शरीर में लगभग 65 प्रतिशत तथा खून में करीब 80 प्रतिशत पानी होता है। ऐसे में शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर की सामान्य क्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं। पशुओं में अत्यधिक कमजोरी, भूख में कमी, दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन घट जाना तथा गाभिन पशुओं में गर्भपात जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही गर्मी के कारण पशुओं में स्ट्रेस का स्तर बढ़ जाता है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वे बीमारियों की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।
डॉ. सुबोध कुमार ने कहा कि गर्मी के मौसम में पशुओं और पक्षियों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। यदि समय पर पानी की पूर्ति न हो तो पशु निढाल हो सकता है और गंभीर स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए पशुपालकों को गर्मी से बचाव के लिए विशेष प्रबंध करने चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि कोई पशु या पक्षी अत्यधिक हांफ रहा हो, कमजोरी या थकान महसूस कर रहा हो, मुंह से लार टपक रही हो, हृदय गति तेज हो गई हो या वह सुस्त पड़ गया हो, तो यह हीट स्ट्रेस के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर उपचार कराना चाहिए। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने कहा कि गर्मी के समय भार ढोने वाले या काम करने वाले पशुओं को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक अवश्य आराम दिया जाए। जब तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो, तब इस नियम का विशेष रूप से पालन किया जाना चाहिए। अन्यथा इसे पशुओं के प्रति क्रूरता की श्रेणी में माना जा सकता है। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि अपने पालतू पशुओं को दिन में कम से कम एक बार नहलाएं और उन्हें छायादार स्थान पर रखें। गर्म हवा के सीधे संपर्क से बचाने के लिए शेड या पदों की व्यवस्था करें। यदि पशुओं के लिए टीन शेड का घर बना हो तो उसकी छत पर घास, पराली या अन्य सामग्री डालकर उसे ठंडा रखने का प्रयास करें। इसके अलावा पशुओं को नियमित रूप से नमक, संतुलित पशु आहार तथा मिनरल मिक्सचर देना भी जरूरी है। इससे दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता और पशुओं में स्ट्रेस भी कम होता है।
डॉ. सुबोध कुमार ने आम जनमानस से भी अपील की है कि वे पशुओं और पक्षियों के प्रति दया का भाव रखें। अपने घरों के बाहर तथा छतों पर पानी के बर्तन रखकर निराश्रित पशुओं और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करें। साथ ही यह ध्यान रखें कि पानी समय-समय पर बदला जाए और उसे छायादार स्थान पर रखा जाए, क्योंकि गर्म पानी पशु-पक्षियों के लिए हानिकारक हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के सभी लोग मिलकर थोड़ी-सी संवेदनशीलता दिखाएं और इन उपायों को अपनाएं, तो पालतू और निराश्रित दोनों प्रकार के पशु-पक्षियों को भीषण गर्मी और लू के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है। इसलिए आवश्यक है कि इन जानकारियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए और सभी को इसके प्रति जागरूक किया जाए।









