वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में आत्मनिर्भरता ही सबसे बड़ी ताकत: राजनाथ सिंह

 

कोलकाता, 6 मार्च। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आज की वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में प्रासंगिक बने रहने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने का एकमात्र रास्ता आत्मनिर्भरता है। उन्होंने यह बात कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प – भारत की समुद्री गौरव की पुनः प्राप्ति’ कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर कही।
रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा और मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण देशों को अपनी रक्षा और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत सुधार कर रही है।
उन्होंने बताया कि भारतीय शिपयार्डों को आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल जहाज डिजाइन उपकरणों और मॉड्यूलर निर्माण तकनीकों के माध्यम से वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
रक्षा मंत्री के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अप्रैल 2026 तक रक्षा निर्यात करीब 29 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां अब भारतीय शिपयार्डों में ही तैयार की जा रही हैं, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत को दुनिया के शीर्ष 10 जहाज निर्माण देशों में शामिल करना और 2047 तक शीर्ष पांच देशों में पहुंचाना है। सम्मेलन में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भारत की समुद्री सुरक्षा और जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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