दुर्गा मन्दिर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सुनील द्विवेदी ने श्री कृष्ण की वाल लीलाओं व गोवर्धन पूजा का वर्णन श्रोताओं को सुनाया

 

कालपी (जालौन) व्यास भूमि कालपी धाम के हाइवे किनारे स्थित दुर्गा मन्दिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास सुनील द्विवेदी ने गोवर्धन लीला के साथ भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का रोचक प्रसंग सुनाया।
नेशनल हाईवे किनारे स्थित दुर्गा मन्दिर मे राजेन्द्र प्रसाद द्विवेदी द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिवस शुक्रवार को कथा व्यास सुनील महाराज ने भगवान की माखन चोरी लीला,कालीदह लीला, गोवर्धन लीलाओं का वर्णन सुनाया श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। व्यास जी ने कहा भगवान ने अपनी लीलाओं से जहां कंस के भेजे विभिन्न राक्षसों का संघार किया वहीं ब्रज के लोगों को आनंद प्रदान किया महाराज जी ने बताया पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन श्री कृष्ण ने देखा कि सभी बृजवासी तरह-तरह के पकवान बना रहे हैं।पूजा का मंडप सजाया जा रहा है और सभी लोग प्रातः काल से ही पूजन की सामग्री एकत्रित करने में व्यस्त है, तब श्रीकृष्ण ने यशोदा जी से पूछा मइया आज सभी लोग किसके पूजन की तैयारी कर रहे हैं ? इस पर मइया यशोदा ने कहा कि पुत्र सभी बृजवासी इंद्रदेव के पूजन की तैयारी कर रहे हैं । तब कान्हा ने कहा कि सभी लोग इंद्र की पूजा क्यों कर रहे हैं ? इस पर माता यशोदा उन्हें बताते हुए कहती हैं कि इंद्रदेव वर्षा करते हैं जिससे अन्य की पैदावार अच्छी होती है और हमारी गायों को चारा प्राप्त होता है । इस पर कान्हा ने कहा कि वर्षा करना तो इंद्र देव का कर्तव्य है। यदि पूजा करनी है तो हमें गोवर्धन पर्वत की करनी चाहिए। क्योंकि हमारी गायें तो वहीं चरती है और हमें फल,फूल ,सब्जियां आदि गोवर्धन पर्वत से प्राप्त होती है और गोवर्धन भगवान ही मेरी रक्षा करते है अतः हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए इसके बाद सभी बृजवासी इंद्रदेव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे । इस बात को देवराज इंद्र ने अपना अपमान समझा और क्रोध में आकर प्रलय दायक मूसलाधार बारिश शुरू कर दी जिससे चारों ओर त्राहि-त्राहि होने लगी । सभी अपने परिवार और पशुओं को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे तब बृजवासी कहने लगे कि यह सब कृष्ण की बात मानने का कारण हुआ है अब हमें इंद्रदेव का कोप सहना पड़ेगा। इसके बाद भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव का अहंकार दूर करने और सभी बृजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया तब सभी बृजवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली । इसके बाद इंद्रदेव को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने कृष्ण से क्षमा याचना की उसी के बाद से गोवर्धन पूजा पूजन की परंपरा आरंभ हुई। गोवर्धन पूजा का उत्सव उल्लास के साथ मनाया गया। साथ ही कथा के दौरान संगीतमय भजनों पर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु नाचते रहे। गोवर्धन प्रसंग समाप्त होने के बाद परीक्षित सौम्या गुप्ता पत्नी रवि गुप्ता के अलावा पं.कुन्नू महाराज,पुजारी राजेन्द्र प्रसाद द्विवेदी,धर्म सिंह यादव, राजेन्द्र पाल,नरेंद्र यादव, मामा कोटेदार,सेवाराम पाल,जानू महाराज, राना रामनारायण सहित भारी संख्या में महिलाएं व श्रोतागण मौजूद रहे तथा समस्त भक्तगणों ने भागवत भगवान की आरती की तथा दीपू द्विवेदी नें सभी को प्रसाद वितरण किया

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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