इंद्र के कोप से प्रजा को बचा भगवान श्रीकृष्ण ने उठा लिया था गोवर्धन पर्वत आचार्य सतीश जी महाराज

 

गजनेर कस्बा के नजदीक ग्राम जवाईया अकबरपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का आज पंचम दिवस भगवान कृष्ण की गोवर्धन लीला और कथा का महत्व बताया गया । कथा वाचक ने श्रद्धालुओं से भक्ति के मार्ग पर चलने की अपील की बताया कि माता पिता से चरणों से बड़ा और कोई तीर्थ नहीं है आचार्य सतीश जी ने बताया भागवत कथा श्रवण करने से जीवन में सुख शांति का समावेश होता है धर्म के प्रति आस्था बढ़ती है इसलिए इस कथा का सुनने का शुभ अवसर सभी को नहीं छोड़ना चाहिए ।
कथा व्यास ने माता पिता की सेवा का महत्व बताते हुए कहा जिसने भी माता-पिता की निस्वार्थ भाव से सेवा करली समझलो उनसे सभी तीर्थों की यात्रा करली माता पिता के चरणों में ही तीर्थ है कथा व्यास ने बताया कि एक बार व्रज वासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी तो इंद्र अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था । उनका गर्व दूर करने के लिए भगवान ने व्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी । इससे गुस्साए इंद्र ने व्रज मंडल पर भारी बरसात कराई प्रलय से लोगों को बचाने के लिए भगवान ने कनिष्ठका उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। सात दिनों के बाद इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ कथा पंडाल में उपस्थित महिलाएं अपने आपको थीकरने से नहीं रोक पाई और प्रभु भक्ति में जमकर झूमि
इस अवसर पर किसान कांग्रेस कमेटी प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित यादव जी के द्वारा मंच पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत पुराण की पूजन की एवं कथावाचक पूज्य सतीश जी महाराज को शाल श्रीफल भेंट कर पुष्प हार पहनाया और प्रदेश उपाध्यक्ष ने आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा का रसपान किया।

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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