कालपी (जालौन) लेखपाल सुधीर सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई आत्महत्या के मामले ने पूरे राजस्व विभाग में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इसी के विरोध में शुक्रवार को तहसील कालपी परिसर में बड़ी संख्या में लेखपालों ने एकजुट होकर एक दिवसीय धरना–प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। लेखपालों ने कहा कि लगातार बढ़ते कार्यभार, मानसिक दबाव और उच्चाधिकारियों के उत्पीड़न के कारण विभागीय कर्मचारी अत्यधिक तनाव झेल रहे हैं, जिसके चलते एस आई आर सुपर बाइजर लेखपाल सुधीर कुमार जैसे संवेदनशील कर्मचारी को आत्महत्या जैसे कदम के लिए मजबूर होना पड़ा।
लेखपाल संघ के अध्यक्ष जयवीर सिंह ने कहा कि सुधीर कुमार की मौत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे विभागीय तंत्र की विफलता का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारियों द्वारा फील्ड कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव डाला जाता है। न तो पर्याप्त संसाधन दिए जाते हैं और न ही सुरक्षा व मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोई कदम उठाया जाता है। ऐसे माहौल में कार्य करना कठिन हो गया है।
लेखपालों ने सरकार व प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही राजस्व कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण, उचित कार्य विभाजन, और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र की स्थापना की जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे।
धरने में मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि सुधीर कुमार की मौत ने विभाग को झकझोर दिया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीतिगत सुधार अत्यंत आवश्यक है। प्रदर्शन के अंत में लेखपाल संघ के प्रतिनिधियों ने एसडीएम कालपी को ज्ञापन सौंपते हुए परिवार को मुआवजा, नौकरी में आश्रित को नियुक्ति और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
धरना शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन कर्मचारियों के आक्रोश ने साफ कर दिया कि अब वे अपनी सुरक्षा व सम्मान से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं करेंगे। इस मौके पर कालपी सदर लेखपाल जितेंद्र यादव, कीरतपुर लेखपाल योगेश यादव राघवेंद्र निरंजन, दयाशंकर कमलेश अमित कुशवाहा श्याम जी अभिषेक यादव प्रशांत गौतम सहित अधिकांश लेखपाल मौजूद रहे!











