कानपुर देहात,
ग्राम दमनपुर थाना राजपुर कानपुर देहात में आशा देवी की कथित तौर पर जबरन ज़हर खिलाए जाने और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कानपुर देहात ने पर्यवेक्षण करते हुए केस डायरी व प्रगति आख्या तलब कर ली है। न्यायालय ने थाना राजपुर पुलिस की विवेचना पर उठे सवालों को देखते हुए विवेचक को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई एक दिसम्बर 2025 को होगी।
मृतका आशा देवी के पुत्र अंकित सिंह, जो स्वयं भी घटना में घायल हुए थे, ने न्यायालय में धारा 175(4) व 175(5) बीएनएसएस के तहत अपने अधिवक्ता जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के माध्यम से प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि थाना राजपुर पुलिस ने दुर्विवेचना कर हत्या-संबंधी धारा 123 बीएनएस हटाकर गलत तरीके से आत्महत्या हेतु उत्प्रेरण की धारा 108 बीएनएस लगा दी, जबकि मृतका ने मृत्यु से पूर्व वीडियो कैमरा के सामने स्पष्ट बयान दिया था कि अभियुक्तगण ने ही उन्हें जबरन ज़हर खिलाया।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, 29 अक्टूबर 2025 को खेत में पड़ी लकड़ी के विवाद को लेकर अभियुक्त वीर सिंह व अन्य आरोपियों ने पहले आशा देवी से झगड़ा किया, फिर वादी अंकित सिंह को गालियाँ देते हुए दौड़ाया, मारपीट की, और आशा देवी को पकड़कर जबरन ज़हर की गोलियाँ खिलाई, जिनके दुष्प्रभाव से उनकी उसी दिन हैलट अस्पताल, कानपुर नगर में मृत्यु हो गई। मृतका का घटना का यह मृत्यु-पूर्व वीडियो बयान पुलिस, मीडिया तथा परिजनों के पास सुरक्षित है।
वादी का यह भी आरोप है कि पुलिस ने दो अभियुक्तों,सुनील सिंह व कृष्णा सिंह,को पकड़कर उसी दिन छोड़ दिया, तथा अभियुक्त पक्ष के दबाव में “उल्टे-सीधे बयान” लिखकर दूषित विवेचना कर रही है। विवेचक द्वारा उचित धाराएँ न लगाने और अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के आरोपों को लेकर वादी ने पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायत दी थी, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
न्यायालय ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण को प्रकीर्ण वाद में दर्ज करआदेश दिया कि विवेचक थाना राजपुर प्रकरण में एक सप्ताह में विवेचना की प्रगति आख्या प्रस्तुत करे। केस डायरी भी तलब की है।
वादी पक्ष की ओर से प्रकरण की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि मृतका का मृत्यु-पूर्व बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस बात का स्पष्ट आधार हैं कि मामला हत्या का है, आत्महत्या उत्प्रेरण का नहीं। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया है कि उचित धारा में बढ़ोतरी कर निष्पक्ष व वैज्ञानिक विवेचना कराई जाए।











