लखनऊअलीगढ़ :
धर्म समाज महाविद्यालय के मिनी आडिटोरियम में सिखों के नवें गुरु गुरू तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस पर उनकी गौरवगाथा को याद किया गया। गुरु तेग बहादुर के बलिदान की कहानी को सुनकर छात्र छात्राएं भावुक हो गए। उन्होंने राष्ट्र रक्षा का संकल्प लिया।
मिनी आडिटोरियम में पूर्वाह्न 11.30 बजे अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम प्रारंभ किया। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष राज नारायण सिंह ने कहा कि गुरू तेग बहादुर ने सिख समाज की नहीं बल्कि संपूर्ण समाज कीs रक्षा की। 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में उन्होंने मां भारती को अपना शीश समर्पित कर दिया, मगर वह टूटे नहीं, झुके नहीं। इस्लाम धर्म को कबूल नहीं किया। इसके बाद पूरे देश में क्रांति की ज्वाला धधक उठी। मुगलों के आक्रमण का प्रतिकार किया जाने लगा। राज नारायण ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जैसी बलिदान की गौरवगाथा दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। उनके पुत्र सिखों के दशवें गुरु गुरु गोविन्द सिंह और चारों पौत्रों ने भी देश धर्म के लिए बलिदान दे दिया। राज नारायण सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि वह भारत के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी करें ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के माध्यम से उनकी कहानियों को समाज तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि विघार्थियों की हर क्षमता के विकास में संगठन पूरा सहयोग करेगा। जत्थेदार भाई भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर के बलिदान के चलते आज देश बच पाया है। नई पीढ़ी को इतिहास को पढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम में आरएएस के महानगर प्रचारक रामजी, विद्यार्थी प्रचारक अवनीश बजरंगी अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. मुकेश भारद्वाज, संयोजन डा. सुनीता गुप्ता एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. दिनेश कुमार गुप्त ने किया। इस अवसर महाविद्यालय परिवार के डा. मंजू गिरि, डा. अंजुल सिंह, डा. अंजना, डा. वेदवती राठी, डा. दीपमाला, डॉ. रामकृष्ण पाण्डेय, डॉ नंदकुमार तिवारी, डॉ. नागेंद्र पटेल, डॉ. रेखा तोमर, डॉ. सौरभ सेंगर, डॉ. दीपमाला मिश्रा, डा. अंजना, डॉ. दुर्गा कुमारी, वार्ष्णेय महाविद्यालय से डा. अजय कुमार तोमर, टीकाराम कन्या महाविद्यालय से डा. प्रियंका, चेतन वार्ष्णेय आदि थे।











